Sunday, February 15, 2009
Hamare dil main koi khwaab pal baitha to hungama
The buzz of my phone woke me up this Sunday. It was a call from my old pal who called me and started the conversation with some sad news. Later we discussed about valentine day, old pals.... work. He cribbed about his office problem and how he sorted things out in office which in itself was a motivational story and the punchline of his story " Hamare dil main koi khwaab pal baitha to hungama " True to his Lucknowi andaz he recited a beautiful poem in mushayra style which left me speechless. All I could say was Wah! Nawab sahab.
Here is the full poetry. Author Dr kumar Vishwas
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है.....
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आँसू हैं,
जो तू समझे तो मोती हैं, जो न समझे तो पानी हैं.....
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूँ प्यार का किस्सा,
कभी तुम सुन्न नहीं पाए, कभी में कह नहीं पाया......
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,
अभी तक डूब के सुनते सब किस्सा मोह्हबत का,
में किस`से को हकीकत में, बदल बैठा तो हंगामा......
मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करता है,
भरी महफिल में भी रुसवा हर बार करता है,
यकीं है सारी दुनिया को खफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है ...
मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नजारे छूट जाते हैं,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं,
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थाप थपाते हैं,
मैं हस्त हूँ तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं ...
समंदर पीर का अन्दर हैं लेकिन रो नही सकता,
यह आसू प्यार का मोटी हैं इसको खो नही सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नही पाया वोह तेरा हो नही सकता...
सजी है खुशनुमा महफिल सभी दिलदार बैठे हैं
जिधर देखो उधर ही इश्क के बीमार बेठे हैं
हंसीनो की अदाओं पे सभी दिल हार बेठे हैं
हजारों मर-मिटे और सैक्दो तैयार बेठे हैं...
मत पूछ की क्या हाल है मेरा तेरे आगे,
तू देख के क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे ....
Here is the full poetry. Author Dr kumar Vishwas
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है.....
मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आँसू हैं,
जो तू समझे तो मोती हैं, जो न समझे तो पानी हैं.....
बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेडे सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया,
अधूरा अनसुना ही रह गया यूँ प्यार का किस्सा,
कभी तुम सुन्न नहीं पाए, कभी में कह नहीं पाया......
भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा,
अभी तक डूब के सुनते सब किस्सा मोह्हबत का,
में किस`से को हकीकत में, बदल बैठा तो हंगामा......
मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करता है,
भरी महफिल में भी रुसवा हर बार करता है,
यकीं है सारी दुनिया को खफा है हमसे वो लेकिन,
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है ...
मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नजारे छूट जाते हैं,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं,
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थाप थपाते हैं,
मैं हस्त हूँ तो मुझसे लोग अक्सर रूठ जाते हैं ...
समंदर पीर का अन्दर हैं लेकिन रो नही सकता,
यह आसू प्यार का मोटी हैं इसको खो नही सकता,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले,
जो मेरा हो नही पाया वोह तेरा हो नही सकता...
सजी है खुशनुमा महफिल सभी दिलदार बैठे हैं
जिधर देखो उधर ही इश्क के बीमार बेठे हैं
हंसीनो की अदाओं पे सभी दिल हार बेठे हैं
हजारों मर-मिटे और सैक्दो तैयार बेठे हैं...
मत पूछ की क्या हाल है मेरा तेरे आगे,
तू देख के क्या रंग हैं तेरा मेरे आगे ....
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About Me
- I me and myself
- I was born a while back. after that, I began to grow up. during this process, I learned to learn, which is not as easy as it sounds. up until very recently, I was. right now I am, and soon I will be. My ME is part of many USs and WEs, not to mention a few OURs. I'm endlessly interested in your YOU, perhaps almost as much as you should be. I am learning to be very good to my Self. I highly suggest trying it some time. it's very liberating. Complexly simple, anxiously resilient; effortless to predict- tough to decipher, hard to know- easy to understand. That’s me!
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